रिहंद डैम टूटने की विभीषिका
(आशंका, प्रभाव और सुरक्षा विश्लेषण)
गोविंद बल्लभ पंत सागर (रिहंद डैम), भारत का दूसरा सबसे बड़ा जलाशय, उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में स्थित है। अगर यह डैम किसी वजह से टूटता है, तो भारत में अब तक की सबसे विनाशकारी मानव निर्मित आपदा का खतरा बन सकता है।
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डैम का तकनीकी प्रोफाइल
| मुख्य डेटा | सांख्यिकीय चित्रण |
|---|---|
| ऊँचाई | 91.46 मीटर (300 फीट) |
| लंबाई | 934.45 मीटर (3,066 फीट) |
| कुल क्षमता | 10.6 बिलियन घन मीटर |
| आयु | 1962 से, 62 वर्ष पुराना |
| स्थिति | संकटग्रस्त – पुनर्वास की आवश्यकता |
▶ संभावित आपदा: कितना बड़ा संकट?
- अगर डैम टूटता है, तो 8.9 बिलियन घन मीटर पानी कुछ घंटों में बह सकता है।
- प्रारंभिक बाढ़ लहर वेग: 60 मीटर/सेकंड
- पीक डिस्चार्ज: 4,95,986 m³/s (मच्छू डैम से 18 गुना अधिक)
- 20+ लाख लोग, 6+ जिले (उ.प्र., बिहार, झारखंड) प्रत्यक्ष खतरे में
इतना पानी छूटने से सोन नदी बेसिन की भौगोलिक स्थिति ही बदल सकती है!
▶ तत्काल और दीर्घकालिक प्रभाव
1. मानव एवं संपत्ति हानि
- हजारों संभावित मौतें (मच्छू डैम डिजास्टर से 42 गुना पैमाना)
- हजारों मकान, उद्योग, सड़कों का सफाया
- संपत्ति में हजारों करोड़ की हानि
- लाखों लोग आस-पास उजड़ कर शरणार्थी बन सकते हैं
2. पर्यावरणीय आपदा
- 35 लाख टन फ्लाई ऐश का प्रदूषण – जल/मिट्टी दोनों विषाक्त
- मछलियों का विनाश, वन्य जीव संकट
- घने जंगल व कृषि भूमि नष्ट
3. आर्थिक तथा सामजिक प्रभाव
- बिजली उत्पादन (300MW) ठप, सिंचाई व्यवस्था ध्वस्त
- ट्रांसपोर्ट, रेलवे, कम्युनिकेशन नेटवर्क तबाह
- पुनर्वास, आपदा राहत पर वर्षों की चुनौती
- बीमारियाँ, मानसिक स्वास्थ्य संकट, सामाजिक अशांति
▶ क्यों हैं इतने बड़े खतरे?
- डैम संकटग्रस्त स्थिति में, रखरखाव की कमी
- समूचे देश में सिर्फ 7% डैम्स के पास इमरजेंसी प्लान
- रिहंद के लिये कोई अनिवार्य मॉकड्रिल/पूर्व तैयारी नहीं
- फ्लाई ऐश, जलवायु परिवर्तन और सिस्मिक जोन के जोखिम
सच्चाई: इतनी बड़ी आबादी, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए डैम पर तत्काल आपदा प्रबंधन तंत्र जरूरी है।
▶ ऐतिहासिक घटनाओं से तुलना
| डैम | मृत्यु | डिस्चार्ज (m³/s) |
|---|---|---|
| मच्छू डैम (1979) | 1,800 + | 26,650 |
| टेर्टन डैम (1976) | 11 | 15,000 (लगभग) |
| रिहंद डैम ( अनुमानित ) | हजारों | 4,95,986 |
▶ क्या होना चाहिए: सुझाव एवं रणनीति
- इमरजेंसी प्लान तुरंत लागू हों
- नीचे बसे गाँवों और शहरों में पूर्व चेतावनी प्रणाली लगाई जाए
- डैम की संरचनात्मक मजबूती और फंडिंग में तेजी
- फ्लाई ऐश और प्रदूषण की समस्या का त्वरित समाधान
- पुनर्वास एवं राहत कार्यों का खाका पहले से तैयार हो
- सरकार - जनता - मीडया समन्वय के लिए वार्ता मंच बनें
निष्कर्ष:
रिहंद डैम का टूटना एक राष्ट्रीय संकट का रूप ले सकता है। आपदा को रोकना अब ही संभव है – समुचित रखरखाव, आपातकालीन योजना और सामुदायिक जागरूकता अत्यंत आवश्यक है।
रिहंद डैम का टूटना एक राष्ट्रीय संकट का रूप ले सकता है। आपदा को रोकना अब ही संभव है – समुचित रखरखाव, आपातकालीन योजना और सामुदायिक जागरूकता अत्यंत आवश्यक है।