अगर रिहंद डैम टूट जाए — कैसी तबाही मच सकती है? जानें विस्तार से
विशेष: रिहंद डैम (Govind Ballabh Pant Sagar), भारत का प्रमुख जलाशय, यदि टूटता है तो यह उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए बनी हुई एक भीषण आपदा की वजह बन सकता है।
रिहंद डैम का संक्षिप्त परिचय
| विवरण | मूल्य |
|---|---|
| लोकेशन | रेणुकूट, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश |
| प्रकार | कंक्रीट ग्रेविटी |
| ऊँचाई | 91.44 मीटर |
| लंबाई | 934.45 मीटर |
| पूरी जलधारण क्षमता | 10.6 बिलियन मी³ |
| ऊर्जा उत्पादन | 300MW |
| निर्माण अवधि | 1954–1962 |
डैम टूटने की स्थिति में तबाही का अनुमान
- तुरंत जानमाल की हानि: कई मीटर ऊँची बाढ़-लहर रेणुकूट, पिपरी, ओबरा, मिर्ज़ापुर, वाराणसी, बिहार तक तबाही लेकर आएगी
- इंफ्रास्ट्रक्चर की तबाही: पुल, सड़कें, रेल मार्ग, बिजलीघर, और औद्योगिक इकाइयों को भारी नुकसान
- खेती-बाड़ी चौपट: उपजाऊ ज़मीन पूरी तरह कट एवं बर्बाद
- पेयजल व्यवस्था ठप: पीने व सिंचाई का पानी बुरी तरह दूषित
- पर्यावरणीय संकट: गाद, औद्योगिक रसायनों एवं कचरे से भारी प्रदूषण
- अस्पताल/स्कूल ध्वस्त: सामाजिक प्रतिष्ठानों को नुकसान, राहत कार्यों में बाधा
- बीमारियाँ एवं पुनर्वास: डेंगू, मलेरिया, दस्त जैसी महामारी और लंबे समय का पलायन
डैम टूटने के संभावित कारण
- ओवरफ्लो (अतिप्रवाह): अत्यधिक बारिश या स्पिलवे खराबी से
- पाईपिंग/सीपेज: बाँध की नींव में छेद या रिसाव
- भूकंपीय गतिविधि या मिट्टी का बैठना
- संरचनात्मक अवमूल्यन व रखरखाव की कमी
- मानवीय त्रुटियाँ या डिज़ाइन में खामी
रोकथाम और सुरक्षा उपाय
- नियमित संरचनात्मक निरीक्षण एवं रखरखाव
- सीपेज मॉनिटरिंग, स्पिलवे क्षमता बढ़ाना
- आपदा प्रबंधन योजना, अलर्ट सिस्टम
- स्थानीय संवेदनशील इलाक़ों की पूर्व-सूचना एवं रिवाज्यूएशन
निष्कर्ष— समय रहते रखरखाव, निगरानी और तैयारियां ही ऐसी सुनामी जैसे संकट से देश को बचा सकती हैं!

