रिहंद डैम: जलस्तर घटना (28 जुलाई 2025)
Govind Ballabh Pant Sagar, जिन्हें आमतौर पर रिहंद डैम के नाम से जाना जाता है, भारत के सबसे बड़े बांधों में से एक है, और उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले का गौरव है। इसकी विशाल जलाशय क्षमता कभी-कभी सुरक्षा की दृष्टि से चुनौती बन जाती है, खासकर जब जलस्तर खतरनाक सीमा के करीब पहुँच जाए।
1. चरम जलस्तर की चेतावनी
- रिहंद डैम का Full Reservoir Level (FRL) लगभग 879.8 फीट है।
- इस बार 28 जुलाई 2025, को सुबह जलस्तर 868.10 फीट दर्ज किया गया, जो नियंतण सीमा के बेहद करीब है।
- इस स्तर को पार करने पर बांध व क्षेत्रीय सुरक्षा हेतु विशेष निर्णय लेने होते हैं।
2. गेट खोलने की प्रक्रिया
- water level निरंतर मॉनिटर किया जाता है।
- अगर स्तर crisis limit के निकट पहुँचता है तो गेट संचालन व रिलीज़ प्लान तैयार किया जाता है।
- इस incident में, Gate no. 7 को 5 ft तक खोला गया (रात 11:15 बजे), ताकि जल प्रबंधन सुरक्षित ढंग से किया जा सके।
पिछले वर्ष अगस्त 2024 में भी भारी वर्षा के कारण डैम का स्तर 868.8 ft पहुँच गया था और उस समय भी 7 गेट खोले गए थे।
3. आसपास के इलाकों की सतर्कता
- फाटक खुलते ही सोन नदी एवं बिहार की ओर पानी का बहाव बढ़ गया।
- संबंधित जिलों को संभावित बाढ़ संबंधी पूर्व सूचना दी गई।
बांध सुरक्षा व डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों की सुरक्षा हेतु गेट खोलना महत्वपूर्ण होता है।
4. पर्यावरण और Power Unit की भूमिका
- पावर यूनिट्स को अधिकतम उत्पादन पर चलाया जाता है ताकि पानी स्तर को प्रदूषण या structural नुकसान से पहले release किया जा सके।
- Water management में हमेशा पर्यावरण और लोगों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता है।
🔍 निष्कर्ष
28 जुलाई 2025 को सुबह जब जलस्तर 868.10 फीट तक पहुँच गया, तब गेट 7 को खोलना बांध के लिए भी और डाउनस्ट्रीम के ग्रामीण इलाकों की सुरक्षा के लिए भी बेहद आवश्यक था। यह 2024 की स्थिति से भी मिलता-जुलता है जब भीषण वर्षा के बाद gates खोलने पड़े थे। ये फैसले संरचनात्मक मजबूती, जनता की सुरक्षा और संभावित बाढ़ नियंत्रण हेतु लिए जाते हैं।
💡 सुझाव
- करीब के गाँवों एवं नावेली इलाकों में रहने वाले सभी नागरिक अलर्ट रहें।
- केंद्रीय जल आयोग या उत्तर प्रदेश जल विद्युत निगम द्वारा जारी किसी भी सूचना/नवीनतम रिपोर्ट/न्यूज मीडिया पर नियमित नजर रखें।

