Generic vs Branded Medicines: कौन सी बेहतर है?
— पूरी मेडिकल व्याख्या हिं ी व अन्य सभी भाषा में —
1. भूमिका
दवाइयाँ आम तौर पर दो श्रेणियों में आती हैं—ब्रांडेड और जेनेरिक। इस लेख में हम इन दोनों के फ़र्क को वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर समझेंगे ताकि आप सही चुनाव कर सकें।
2. मुख्य अंतर
| पहलू | ब्रांडेड दवा | जेनेरिक दवा |
|---|---|---|
| डेवलपमेंट | ओरिजिनल रिसर्च व पेटेंट | पेटेंट समाप्त होने के बाद |
| एक्टिव इंग्रेडिएंट | मूल (Original) | समान |
| क्वालिटी स्टैंडर्ड | उच्च, GMP आधारित | समान, FDA/CDSCO प्रमाणित |
| कीमत | उच्च | कम |
| पैकेजिंग/ब्रांड | आकर्षक ब्रांड नेम | सामान्य पैकेजिंग |
2.1 Bioequivalence क्या है?
किसी भी जेनेरिक दवा को तब ही मंज़ूरी मिलती है जब वह बायोइक्विवेलेन्ट सिद्ध हो, अर्थात् प्लाज़्मा-कंसंट्रेशन टाइम प्रोफ़ाइल, प्रभावकारिता तथा सुरक्षा ब्रांडेड दवा के समान हो।
2.2 Pharmacokinetics थोड़ा और गहराई से
Absorption, Distribution, Metabolism तथा Excretion (ADME) पैरामीटर दोनों फार्मूलेशन में बराबर होने चाहिए ताकि चिकित्सीय परिणामों में कोई clinically significant अंतर न पड़े।
3. क्या जेनेरिक दवा सुरक्षित है?
एफिकेसी: Active ingredient समान होने के कारण रोग पर प्रभाव भी समान होता है।
इनऐक्टिव इंग्रेडिएंट: रंग/फ्लेवर में अंतर हो सकता है, पर Medicinal effect अपरिवर्तित रहता है।
4. कब जेनेरिक चुनें, कब नहीं?
- जब Cost प्राथमिक हो—जेनेरिक आदर्श विकल्प हैं।
- नैरो थैरेप्यूटिक इंडेक्स ड्रग्स (जैसे एंटी-एपिलेप्टिक्स) बदलते समय डॉक्टर से पूछें।
- हमेशा रजिस्टर्ड फार्मेसी से दवा लें।
Clinical Example
45-वर्षीय डायबिटिक रोगी को Metformin 500 mg दी जाती है। Branded “Gluconorm” और Generic “Metform” दोनों की ग्लाइसेमिक कंट्रोल पर समान क्षमता देखी गई—कोई clinically significant अंतर नहीं।


